नज़ीर अकबराबादी

नज़ीर अकबराबादी

नज़ीर अकबराबादी (1740-1830) उर्दू में नज़्म लिखने वाले पहले कवि माने जाते हैं. समाज की हर छोटी-बड़ी ख़ूबी को नज़ीर ने कविता में तब्दील कर दिया. वे अरसे तक उपेक्षित रहे. काफी समय तक उन्हें कवि तक नहीं माना गया, लेकिन आगे चल कर उन्हें भारतीय शायरी के श्रेष्ठ रचनाकारों में गिना जाता है.

Title

पेट
चपाती
जब खेली होली नंद ललन हंस हंस नंदगांव बसैयन में
सनम तू हमसे न हो बदगुमान होली में
बजा लो तबलो तरब इस्तमाल होली का
वज़्द-व-हाल
होली ने मचाया है अज़ब रंग ज़मीं पर
मज़म्मते अहले दुनियाँ
जो ज़र्द जोड़े से ऐ यार! तू खेले होली
हिन्द के गुलशन में जब आती है होली की बहार
हां इधर को भी ऐ गुंचादहन पिचकारी
बुतों के ज़र्द पैराहन में इत्र चंपा जब महका
होली की रंग फ़िशानी से है रंग यह कुछ पैराहन का
जब आई होली रंग भरी, सो नाज़ो अदा से मटकमटक
होली की बहार आई फ़रहत की खिलीं कलियां
हर चार तरफ़ होली की धूमें हैं अहा! हा!
उड़ा ज़मीं से ज़मां तक गुलाल होली में
अजब यह हिन्द की देखी बहार होली में
जुबां पे नाम हुआ बार-बार होली का
आदमीनामा
ख़ुशामद
रोटिया
अजल का पयाम
दम का तमाशा
बाज़ार गली और कूचों में गुल शोर मचाया होली ने
होली हुई नुमायां सौ फ़रहतें सभलियां
दम ग़नीमत है
जब फ़ागुन रंग झमकते हों तब देख बहारें होली की
आलम में फिर आई तरब उनवान से होली
पेट की फ़िलासफ़ी
आशिक़ों की भंग-1
फ़कीरों की सदा-2
तवक्कुलो तर्को तजरीद
बंजारानामा
ख़ुशी से दान देने की प्रेरणा
तंबीहुल गाफ़िलीन
दुनियां में
मौत की फ़िलासफ़ी
ग़फ़लत का ख़्वाब
कल जुग
मौत
पूरे हैं वही मर्द, जो हर हाल में ख़ुश हैं
मौत का धड़का
ख़ुदा की दी हुई नेमतें
ख़ुदा की बातें ख़ुदा ही जाने
दुनियाँ भी क्या तमाशा है
इश्क़ की मस्ती
आशिक़ों की सब्ज़ी
आशिक़ों की भंग-2
अब होली खेलने का पूरा कमाल आया
फ़कीरों की सदा-1
तन का झोंपड़ा
तवक्कुल
फ़ना (मौत)-2
फ़ना (मौत)-1
तौहीद
कुदरत का गुलदस्ता
बम शंकर बोलो हरी-हरि