गाएं-गुनगुनाएं

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लरज़ता है मेरा दिल, ज़हमते-मेहरे-दरख़्शां पर
जहां तेरा नक़्शे-क़दम
ज़ख़्म पर छिड़कें कहां तिफ़लाने-बेपरवा नमक
वो मेरी चीन-ए-जबीं से ग़मे-पिनहां समझा
हुई ताख़ीर तो कुछ बाइस-ए-ताख़ीर भी था
फिर मुझे दीदा-ए-तर याद आया
दरख़ुरे-क़हरो-ग़ज़ब जब कोई हम सा न हुआ
बला से हैं जो ये पेशे-नज़र दरो-दीवार
अर्ज़-ए-नियाज़-ए-इश्क़ के क़ाबिल नहीं रहा